छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा! राजस्व विभाग सबसे आगे, जानिए किस जिले में सबसे ज्यादा मामले

Chhattisgarh Corruption Data

Chhattisgarh Corruption Data: छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर ACB और EOW के आंकड़े सामने आए हैं। साल 2021 से मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी के 154 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 193 शासकीय सेवकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। आंकड़ों के मुताबिक, विभागवार मामलों में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। वहीं, जिलों की सूची में सूरजपुर पहले स्थान पर है।

राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी के मामले

ACB और EOW के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच साल के दौरान राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए। इन मामलों में SDO से लेकर कोटवार तक के नाम शामिल हैं। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग दूसरे और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तीसरे स्थान पर रहा।

वहीं, परिवहन विभाग में इस अवधि के दौरान रिश्वतखोरी का केवल एक मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। विभागों के बीच मामलों की संख्या में यह अंतर सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े करता है।

2021 से मई 2026 तक कब कितने मामले दर्ज हुए?

साल-दर-साल आंकड़ों पर नजर डालें तो रिश्वतखोरी के मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वर्ष 2021 में 13 मामलों में 14 शासकीय सेवकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वर्ष 2022 में भी 13 मामले दर्ज हुए, जिनमें 18 कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। वहीं, वर्ष 2023 में कोई मामला सामने नहीं आने की जानकारी दी गई है।

इसके बाद वर्ष 2024 में रिश्वतखोरी के 44 मामलों में 57 शासकीय सेवकों के खिलाफ कार्रवाई हुई। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 60 मामलों तक पहुंच गई, जिनमें 71 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। मई 2026 तक 24 मामले दर्ज हुए और 33 शासकीय सेवकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

सूरजपुर में सबसे ज्यादा मामले, रायपुर दूसरे नंबर पर

जिलेवार आंकड़ों में सूरजपुर 16 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा। राजधानी रायपुर में रिश्वतखोरी के 13 मामले दर्ज किए गए, जबकि सरगुजा 12 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। रायगढ़ में भी रिश्वतखोरी से जुड़ी 11 FIR दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

इसके उलट, जशपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बालोद और सुकमा में एक-एक मामला दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दर्ज मामलों की संख्या में अंतर सामने आता है।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की चुनौती

ACB और EOW के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर विभागीय और जिलेवार स्थिति अलग-अलग है। राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा मामले दर्ज होना और वर्ष 2024 व 2025 में मामलों की संख्या बढ़ना खास तौर पर ध्यान खींचता है।

हालांकि, दर्ज मामलों की संख्या अपने आप में किसी विभाग या जिले में भ्रष्टाचार की वास्तविक व्यापकता का पूरा आकलन नहीं है। अब अहम सवाल यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होती है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।