TV न्यूज का ब्लैकआउट: 58% लोग YouTube पर देख रहे खबरें, BARC में गिरा पूरा जॉनर, पैसा और दर्शक दोनों गए डिजिटल पर

TV News viewership decline India. रात 9 बजे, जब देश का सबसे बड़ा मुद्दा आपके TV पर चीख रहा होता है, तब देश का युवा उसी मुद्दे को 9 सेकंड की Reels पर स्वाइप कर रहा होता है। एंकर चिल्ला रहा है, लेकिन दर्शक म्यूट कर चुका है। ये सिर्फ एक चैनल की नहीं, पूरे न्यूज जॉनर की कहानी है।

TV न्यूज देखना सच में कम हुआ है?

BARC की ताजा रिपोर्ट कहती है कि पूरे न्यूज जॉनर में गिरावट देखी गई है। ये गिरावट अकेली नहीं है। भारत में कुल लीनियर TV की पहुंच ही गिरकर Q3 FY26 में 737 मिलियन रह गई है, जो पिछली तिमाही में 749 मिलियन थी। लोग TV ही कम देख रहे हैं, तो न्यूज कैसे देखेंगे?

FICCI-EY 2025 की रिपोर्ट ने तो ताबूत में आखिरी कील ठोक दी। पहली बार इतिहास में डिजिटल मीडिया ने TV को पछाड़कर भारत का सबसे बड़ा M&E सेगमेंट बन गया है – 32% हिस्सेदारी के साथ, 17% ग्रोथ के साथ।  टीवी विज्ञापन में 6.4% की गिरावट आई है, क्योंकि दर्शक और पैसा दोनों Connected TV की तरफ शिफ्ट हो गए हैं, और CTV की कमाई अब डिजिटल में गिनी जाती है। TV का पैसा ही सूख रहा है।

दर्शक खबरों के लिए कहाँ जा रहे हैं?

Reuters Institute की Digital News Report 2025 ने भारत की तस्वीर साफ कर दी है:

  • ठिकाना नंबर 1 – YouTube: भारत में 58% लोग खबरों के लिए YouTube पर भरोसा करते हैं। YouTube खुद कहता है अब 87% भारतीय रोज YouTube इस्तेमाल करते हैं, जबकि TV या VOD सिर्फ 28%। YouTube अब खुद को “India’s New TV” कह रहा है।
  • ठिकाना नंबर 2 – WhatsApp: 56% भारतीय खबरों के लिए WhatsApp पर निर्भर हैं, जो 2021 से 10 पॉइंट बढ़ा है। खबर अब प्राइम टाइम में नहीं, फैमिली ग्रुप में आती है।
  • ठिकाना नंबर 3 – Instagram Reels / Short Video: Meta की रिपोर्ट कहती है कि 95% लोग रोज Instagram या Facebook Reels देखते हैं, जबकि YouTube 88% और TV सिर्फ 83%। खबर अब 30 मिनट के बुलेटिन में नहीं, 30 सेकंड की रील में चाहिए।

क्यों भाग रहे हैं दर्शक?

  1. भरोसे का संकट: Reuters के मुताबिक 52% भारतीय अक्सर खबरों से बचते हैं (News Avoidance)।
  2. फॉर्मेट: युवा पढ़ना नहीं, देखना-सुनना चाहता है। 40% देखना पसंद करते हैं, 23% सुनना – पढ़ने वाले सिर्फ 38% हैं।
  3. BARC का सस्पेंस: 2020 के TRP स्कैम के बाद से न्यूज चैनलों की रेटिंग दो बार सस्पेंड हुई, और अब सरकार ने लैंडिंग पेज के कारण रेटिंग रोकने के निर्देश दिए हैं। जब मापने वाला पैमाना ही सवालों में हो, तो विज्ञापनदाता पैसा क्यों लगाएगा?

BARC क्या है

BARC का पूरा नाम है Broadcast Audience Research Council है। ये वही संस्था है जो भारत में कौन सा चैनल, कौन सा शो कितने लोग देख रहे हैं, इसकी TRP / व्यूअरशिप मापती है। 2010 में बनी थी।

न्यूज चैनल बंद नहीं होंगे, लेकिन उनका अवतार बदल रहा है। टीवी चैनलों का असली युद्ध TV पर नहीं, YouTube और Instagram पर है। जो चैनल 9 बजे का शोर 9 सेकंड की सच्ची रील में नहीं बदल पाया, उसका ब्लैकआउट तय है।

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