खाताधारक के निधन के बाद बैंक में जमा पैसों का क्या होता है? जानिए क्लेम करने का पूरा और सही प्रोसेस
Bank account after death. जीवन की अनिश्चितताओं के बीच, किसी प्रियजन का अचानक निधन परिवार को भावनात्मक रूप से तोड़ देता है। ऐसे मुश्किल समय में वित्तीय परेशानियां दुख को और बढ़ा सकती हैं। अक्सर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि परिवार के किसी सदस्य के निधन के बाद उनके बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या लॉकर में रखी संपत्ति का क्या होता है और उसे कैसे हासिल किया जा सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, मृतक के खाते की राशि बैंक के पास सुरक्षित रहती है। इसे हासिल करने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि खाते में नॉमिनी (Nominee) दर्ज है या नहीं।
1. अगर खाते में नॉमिनी (Nominee) दर्ज है
यह सबसे आसान और सीधा तरीका है। कानून के अनुसार, नॉमिनी खाते की रकम का मालिक नहीं, बल्कि एक ‘ट्रस्टी’ होता है। बैंक का काम नॉमिनी को पैसा सौंपना है, जिसके बाद नॉमिनी की जिम्मेदारी होती है कि वह उस पैसे को कानूनी वारिसों (Legal Heirs) में बांटे (यदि नॉमिनी खुद अकेला कानूनी वारिस नहीं है)।
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जरूरी दस्तावेज: नॉमिनी को बैंक में क्लेम फॉर्म के साथ मृतक का ओरिजिनल डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र), अपनी केवाईसी (KYC – आधार, पैन) और पासबुक या एफडी की रसीद जमा करनी होती है। वेरिफिकेशन के बाद बैंक 15 दिनों के भीतर राशि नॉमिनी के खाते में ट्रांसफर कर देता है।
2. जॉइंट अकाउंट (Joint Account) का मामला
अगर खाता ‘Either or Survivor’ (कोई एक या उत्तरजीवी) या ‘Anyone or Survivor’ के तहत खोला गया है, तो प्रक्रिया बहुत सरल हो जाती है।
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एक खाताधारक के निधन पर जीवित खाताधारक (Survivor) को केवल मृतक का डेथ सर्टिफिकेट और एक आवेदन बैंक में देना होता है। इसके बाद बैंक मृतक का नाम खाते से हटा देता है और पूरा नियंत्रण जीवित सदस्य को सौंप देता है।
3. अगर खाते में कोई नॉमिनी नहीं है (Without Nominee)
यह स्थिति परिवार के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बनती है। बिना नॉमिनी वाले खाते से पैसा निकालने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी और जटिल होती है।
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कम राशि के लिए: अगर खाते में जमा राशि बैंक की तय सीमा (आमतौर पर 5 लाख रुपये तक) से कम है, तो बैंक कानूनी वारिसों से एक ‘क्षतिपूर्ति बांड’ (Indemnity Bond), परिवार के अन्य सदस्यों का ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) और परिवार का वंशावली प्रमाण पत्र लेकर पैसा जारी कर सकता है।
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बड़ी राशि के लिए: अगर रकम ज्यादा है, तो कानूनी वारिसों को कोर्ट से ‘उत्तराधिकार प्रमाण पत्र’ (Succession Certificate) या ‘लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ लाना पड़ता है। कोर्ट से यह सर्टिफिकेट बनवाने में कई महीने लग सकते हैं और कानूनी खर्च भी आता है।
मृतक के परिजनों के लिए क्लेम करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
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बैंक को सूचित करें: मृत्यु के तुरंत बाद बैंक को लिखित में सूचित करें ताकि खाते से कोई अनधिकृत लेनदेन न हो सके।
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डेथ सर्टिफिकेट प्राप्त करें: नगर निगम या ग्राम पंचायत से मृतक का असली मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) जल्द से जल्द बनवाएं। इसकी कई प्रतियां अपने पास रखें।
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क्लेम फॉर्म भरें: संबंधित बैंक की शाखा में जाकर ‘डिसीज्ड क्लेम फॉर्म’ (Deceased Claim Form) लें। इसे बैंक की वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
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दस्तावेज जमा करें: क्लेम फॉर्म के साथ डेथ सर्टिफिकेट, नॉमिनी/कानूनी वारिस के KYC दस्तावेज, मृतक का पैन कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक नत्थी करके जमा करें।
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अकाउंट सेटलमेंट: बैंक सभी दस्तावेजों की जांच (Verification) करेगा। सब कुछ सही पाए जाने पर बैंक मृतक का खाता बंद कर देगा और पूरी राशि (ब्याज सहित) नॉमिनी या कानूनी वारिस के खाते में ट्रांसफर कर देगा।
बैंकिंग से जुड़ी यह परेशानी इस बात को साबित करती है कि हर व्यक्ति को अपने बैंक खातों, एफडी, म्यूचुअल फंड और बीमा पॉलिसियों में नॉमिनी का नाम जरूर दर्ज कराना चाहिए। एक छोटा सा फॉर्म भरकर आप अपने परिवार को भविष्य में कोर्ट-कचहरी और बैंकों के चक्कर काटने से बचा सकते हैं। समय-समय पर अपने बैंक रिकॉर्ड की जांच करें और सुनिश्चित करें कि आपका नॉमिनेशन अपडेटेड है।

