1 अक्टूबर से ट्रेनों में शुरू होगा रेलवे का ‘महा-चेकिंग अभियान’, सफर करने से पहले जान लें ये सख्त नियम
Railway Checking Drive. त्योहारी सीजन में ट्रेनों में उमड़ती भीड़ के बीच रेलवे 1 अक्टूबर से ‘महा-चेकिंग अभियान’ शुरू करने जा रहा है। नवरात्र, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को परेशानी से बचाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस दौरान स्टेशनों से लेकर ट्रेनों के अंदर तक सख्त निगरानी रखी जाएगी।
इस अभियान में क्या होगा?
1 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस विशेष अभियान के तहत रेलवे के कमर्शियल विभाग, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की संयुक्त टीमें (फ्लाइंग स्क्वॉड) बनाई गई हैं।
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सघन टिकट चेकिंग: स्लीपर और एसी (AC) कोच में जनरल या वेटिंग टिकट लेकर घुसने वालों पर खास नजर रहेगी। बिना टिकट पकड़े जाने पर भारी जुर्माना वसूला जाएगा और जरूरत पड़ने पर रेलवे एक्ट के तहत जेल भी भेजा जा सकता है।
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अवैध वेंडर्स पर नकेल: ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर बिना लाइसेंस के पानी, चाय या खाना बेचने वाले अवैध वेंडर्स को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा।
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सामान और ज्वलनशील पदार्थों की जांच: दिवाली को देखते हुए लोग ट्रेनों में पटाखे या अन्य ज्वलनशील पदार्थ लेकर न जाएं, इसके लिए लगेज स्कैनर और स्निफर डॉग्स की मदद से सघन जांच की जाएगी।
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दिव्यांग और महिला कोच की निगरानी: महिला डिब्बों और दिव्यांगों के लिए आरक्षित कोच में सफर करने वाले अनधिकृत यात्रियों को तुरंत बाहर निकालकर कार्रवाई की जाएगी।
किसे क्या करना होगा?
यात्रियों के लिए:
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सफर के दौरान अपना वैध और कन्फर्म टिकट तथा एक ओरिजिनल आईडी प्रूफ (जैसे आधार या वोटर आईडी) हमेशा साथ रखें।
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जनरल टिकट लेकर स्लीपर या एसी बोगी में चढ़ने की गलती बिल्कुल न करें।
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त्योहारी भीड़ को देखते हुए ट्रेन छूटने के समय से कम से कम 45 मिनट पहले स्टेशन पहुंचें।
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किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ (पटाखे, गैस सिलेंडर, पेट्रोल) साथ लेकर यात्रा न करें।
रेलवे और सुरक्षा बलों के लिए:
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RPF और GRP के जवान सादे कपड़ों में भी ट्रेनों और स्टेशनों पर गश्त करेंगे।
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टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) की छुट्टियां रद्द या सीमित कर दी गई हैं, ताकि हर रूट की ट्रेनों में पर्याप्त स्टाफ मौजूद रहे।
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स्टेशनों के CCTV कंट्रोल रूम को 24 घंटे एक्टिव मोड पर रखा जाएगा ताकि भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) सही से हो सके।
इस अभियान की जरूरत क्यों पड़ी?
हर साल त्योहारी सीजन में ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं होती। अक्सर देखा जाता है कि जिन यात्रियों ने महीनों पहले रिजर्वेशन कराया होता है, उन्हें बिना टिकट या वेटिंग टिकट वाले यात्रियों की भीड़ के कारण अपनी सीट तक पहुंचने में भी जद्दोजहद करनी पड़ती है।
इसके अलावा, अत्यधिक भीड़ के कारण स्टेशनों पर भगदड़ (Stampede) की स्थिति बनने का डर रहता है और चोरी, जेबकतरी व असामाजिक तत्वों की सक्रियता बढ़ जाती है। रेलवे ने यह साफ कर दिया है कि यह अभियान सीधे तौर पर वैध यात्रियों के अधिकार और उनकी सुरक्षित यात्रा को सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि त्योहारों के मौके पर लोगों का सफर सुविधाजनक और सुरक्षित रहे।
किसने जारी किया है आदेश
1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले इस विशेष टिकट चेकिंग अभियान का आदेश मध्य रेल (Central Railway) द्वारा जारी किया गया है।
इस आदेश से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं:
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आदेश किसने जारी किया: आधिकारिक तौर पर यह घोषणा मध्य रेलवे जोन (Central Railway Zone) की ओर से की गई है। रेलवे में इस तरह के जोन-स्तरीय अभियान का आधिकारिक आदेश जोन के प्रमुख मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक (PCCM) या महाप्रबंधक (General Manager) के निर्देशों के तहत जारी किया जाता है, जिसकी सार्वजनिक जानकारी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) द्वारा दी जाती है।
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आदेश कब जारी हुआ: मध्य रेलवे प्रशासन ने इस अभियान से जुड़ा सर्कुलर और इसकी जानकारी हाल ही में 28-29 सितंबर 2026 को आधिकारिक प्रेस रिलीज के जरिए मीडिया को दी है।
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अभियान की अवधि: यह गहन टिकट जांच अभियान 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
आदेश में अधिकारियों ने क्या विशेष निर्देश दिए हैं?
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कंसेशन (रियायती किराए), निर्धारित आरक्षण कोटे और रेलवे पास (E-Pass/PTO) पर सफर करने वाले यात्रियों को अपना ओरिजिनल आईडी प्रूफ (Original ID Proof) साथ रखना अनिवार्य होगा।
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यदि एक ही टिकट (PNR) पर एक से अधिक यात्रियों की बुकिंग है, तो यात्रा करने वाले कम से कम एक यात्री के पास ओरिजिनल आईडी होना जरूरी है। ऐसा न होने पर नियम के अनुसार टिकट पर मौजूद सभी यात्रियों को बिना वैध टिकट के यात्रा करता हुआ माना जाएगा और उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।
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अधिकारियों के अनुसार इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य आरक्षण सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकना, फर्जी पास या रियायतों के अनुचित इस्तेमाल पर लगाम लगाना तथा रेलवे के राजस्व को हो रहे नुकसान से बचाना है।

