जंतर-मंतर प्रोटेस्ट: 22 घंटे बाद ध्रुव राठी रिहा, दीपके को 1 साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहाई
Jantar Mantar Protest Update. दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले राजधानी में भारी राजनीतिक और पुलिसिया हलचल देखने को मिली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाए गए इस प्रदर्शन को पुलिस ने अनुमति नहीं दी। प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने कई बड़े चेहरों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें अब कड़ी शर्तों के साथ रिहा किया गया है।
अभिजीत दीपके और अन्य नेताओं की रिहाई की शर्तें
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, रांका और दास समेत अन्य नेताओं को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया था। पुलिस ने इन नेताओं को इस सख्त शर्त पर रिहा किया है कि उन्हें अगले एक साल तक पूर्ण शांति बनाए रखनी होगी। उन्हें किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होने से रोक दिया गया है जिससे कानून-व्यवस्था या शांति भंग होने का खतरा हो।
ध्रुव राठी का क्या हुआ?
मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी, जो इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए हाल ही में भारत लौटे थे, उन्हें दिल्ली पुलिस ने उनके गुरुग्राम स्थित आवास से सुबह के वक्त हिरासत में ले लिया था। लगभग 22 घंटे की लंबी हिरासत के बाद पुलिस ने उन्हें रात करीब 3 बजे रिहा किया। रिहाई के तुरंत बाद ध्रुव राठी ने एक वीडियो जारी कर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को “अघोषित आपातकाल” करार दिया और पुलिस पर गुंडों जैसा बर्ताव करने का आरोप लगाया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि वह दोबारा बिना अनुमति जंतर-मंतर जाने का प्रयास करते हैं, तो फिर से कार्रवाई की जाएगी।
मीडिया और इंटरनेट पर बंदिश लगाने का आधार
प्रदर्शन को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के आधार पर प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए। मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का प्रस्ताव रखा गया और कुछ ट्रेनों को भी रद्द किया गया। पुलिस का तर्क था कि भीड़ को उकसाने और किसी भी हिंसक स्थिति से बचने के लिए संचार माध्यमों पर यह रोक जरूरी थी। सीमाओं पर ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी बढ़ाई गई।
इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर ध्रुव राठी के एक वायरल वीडियो को लेकर भी कानूनी कार्रवाई चल रही है। दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में दावा किया गया है कि वीडियो से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार की ‘ग्रीवांस अपीलेट कमेटी’ (GAC) को 15 दिन के भीतर वीडियो हटाने या न हटाने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

